बीकानेर में बढ़ता नशा – मौतों का खेल छुपाया जा रहा है!
बीकानेर, जिसे कभी संस्कृति, कला और वीरता के लिए जाना जाता था, आज नशे की गिरफ्त में है। गलियों से लेकर कॉलेजों तक, हर जगह नशे का ज़हर फैल रहा है। अफ़सोस की बात यह है कि नशे में हुई हजारों मौतों को छुपा दिया जाता है, ताकि शहर की सच्चाई बाहर न आ सके।
नशे का बढ़ता कारोबार
शराब और अवैध ज़हरीली शराब
नशे के इंजेक्शन और दवाइयाँ
गांजा, अफ़ीम और अन्य ड्रग्स
युवाओं से लेकर मध्यम आयु वर्ग तक हर कोई इस लत में फँसता जा रहा है।
मौतों की सच्चाई
हर साल नशे से सैकड़ों जानें जाती हैं।
कई मामलों को बीमारी या हादसा बताकर दबा दिया जाता है।
अस्पतालों और पुलिस रिकॉर्ड में असली आंकड़े सामने नहीं आते।
जिम्मेदारी किसकी है?
👉 नशा रोकना प्रशासन और नेताओं की जिम्मेदारी है।
👉 लेकिन हकीकत में नशे का कारोबार पुलिस और राजनेताओं की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं।
👉 छोटे-छोटे पैडलर जेल जाते हैं, बड़े सप्लायर और सरगना खुलेआम घूमते हैं।
युवा पीढ़ी बर्बादी की ओर
कॉलेज और स्कूल के छात्र सबसे आसान शिकार बनते हैं।
बेरोजगारी और अवसाद नशे को और बढ़ावा देते हैं।
परिवार तबाह हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
मीडिया की खामोशी
कुछ घटनाएँ सामने आती हैं, लेकिन ज़्यादातर मौतों पर पर्दा डाल दिया जाता है।
जनता को असली तस्वीर दिखाने की बजाय सिर्फ़ छोटी खबर बनाकर भुला दिया जाता है।
जनता से सवाल
👉 आखिर नशे से होने वाली मौतों को क्यों छुपाया जा रहा है?
👉 क्या नेताओं और प्रशासन की कुर्सी बचाने के लिए बीकानेर की युवा पीढ़ी कुर्बान हो रही है?
👉 कब तक नशे के कारोबारी बेखौफ घूमते रहेंगे?
निष्कर्ष
बीकानेर में नशे का बढ़ता जाल सिर्फ़ एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का सवाल है।
अगर अभी आवाज़ नहीं उठाई गई तो आने वाले समय में बीकानेर का हर घर इस ज़हर से प्रभावित होगा।
👉 बीकानेर की जनता पूछ रही है – नशे से हुई मौतों पर पर्दा क्यों डाला जाता है? क्या नशे के सौदागर नेताओं और प्रशासन के संरक्षित हैं?
बीकानेर में बढ़ता नशा – मौतों का खेल छुपाया जा रहा है!
Puchta Hai Bikaner की शुरुआत बीकानेर की असली समस्याओं को लोगों तक पहुँचाने की पहल के रूप में हुई थी। हमारी टीम बिना किसी लाग-लपेट के शहर और प्रदेश की आवाज़ आप तक पहुँचाने का काम कर रही है।"
Leave a Comment
Leave a Comment



