बीकानेर शहर इन दिनों एक अनोखी पहचान बना रहा है। विकास, स्वच्छता और जागरूकता की बातें तो हर मंच पर होती हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात ऐसे हैं कि लगता है गंदगी फैलाना अब नागरिक कर्तव्य बन चुका है। कहीं सड़क के बीच कचरे के ढेर, कहीं नालियों में पॉलीथिन, तो कहीं खुले में थूकने और कचरा फेंकने की खुली छूट—और हैरानी की बात ये कि सबकुछ “अपने शहर है” वाले गर्व के साथ किया जा रहा है। नगर निगम सफाई करता है, लेकिन कुछ ही घंटों में वही जगह फिर से कूड़ेदान नहीं, बल्कि ओपन डंपिंग ज़ोन बन जाती है।
बीकानेर के लोग मोहल्ले में कचरा फेंकते वक्त यह जरूर कहते दिखते हैं— “कोई बात नहीं, सुबह गाड़ी आ जाएगी।”
मतलब जिम्मेदारी हमारी नहीं, सिर्फ शिकायत हमारा हक़ है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि जब बात बाहर से आने वाले मेहमानों की होती है, तो वही लोग कहते हैं—“बीकानेर बड़ा साफ शहर है।” शायद साफ शब्दों का मतलब अब सिर्फ पोस्टर और भाषण तक सीमित रह गया है।
सवाल सीधा है— जब गंदगी हम खुद फैलाएंगे, तो दोष किसे देंगे? नगर निगम को? सिस्टम को? या फिर उसी शहर को, जिसे हम “अपना” कहते हैं? बीकानेर को साफ बनाने के लिए सबसे पहले मशीन नहीं, मानसिकता बदलने की ज़रूरत है। वरना शहर तो स्मार्ट कहलाएगा…और नागरिक सिर्फ “गंदगी मैनेजमेंट एक्सपर्ट”।
बीकानेर कचरा फैलाने में भी नंबर-1! गलियों से लेकर चौराहों तक ‘जनता जनार्दन’ ने संभाली गंदगी की कमान देखे वीडियो
बीकानेर को साफ बनाने के लिए सबसे पहले मशीन नहीं, मानसिकता बदलने की ज़रूरत है। वरना शहर तो स्मार्ट कहलाएगा…और नागरिक सिर्फ “गंदगी मैनेजमेंट एक्सपर्ट”।
Puchta Hai Bikaner की शुरुआत बीकानेर की असली समस्याओं को लोगों तक पहुँचाने की पहल के रूप में हुई थी। हमारी टीम बिना किसी लाग-लपेट के शहर और प्रदेश की आवाज़ आप तक पहुँचाने का काम कर रही है।"
Leave a Comment
Leave a Comment



