बीकानेर के केईएम रोड पर ट्रैफिक व्यवस्था नहीं, बल्कि वसूली व्यवस्था चल रही है—ऐसा आरोप ठेले लगाने वालों ने लगाया है। शुक्रवार को एक ठेला संचालक और ट्रैफिक पुलिस कर्मी के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई और खुलेआम बदसलूकी तक पहुंच गया। आरोप है कि ट्रैफिक कर्मी ने गुस्से में आकर ठेले का सामान सड़क पर इधर-उधर फेंक दिया। ठेला संचालक का कहना है कि वे रोज़ाना ट्रैफिक कर्मी को 200 रुपए देते हैं, फिर भी दो घंटे बाद ठेला हटाने के लिए मजबूर किया जाता है।
मामला यहीं नहीं रुका। जब रिपोर्टर ने घटना का वीडियो बनाना शुरू किया तो पुलिस कर्मी ने उनसे भी बदतमीजी करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। सवाल यह है कि क्या वर्दी में बैठा व्यक्ति ऐसी भाषा और व्यवहार का हकदार होता है? शायद यही वजह है कि बीकानेर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की जगह बिगड़ती जा रही है। कानून के रखवाले अगर खुद कानून को मज़ाक बना दें, तो आम जनता जाए तो जाए कहां?
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