बीकानेर।
प्रदेशभर में कड़कड़ाती सर्दी और घना कोहरा इस कदर हावी है कि जनजीवन मानो पॉज मोड में चला गया हो। बीकानेर समेत राजस्थान के कई जिलों में पिछले एक हफ्ते से शीतलहर ने ऐसा शिकंजा कसा है कि सुबह-शाम घर से निकलना किसी साहसिक अभियान से कम नहीं। तापमान लगातार लुढ़क रहा है और कोहरा सड़कों पर ऐसे डटा है जैसे हटने का नाम ही न ले। सर्दी से बचने के लिए लोग अलाव, हीटर और ऊनी कपड़ों के भरोसे हैं, लेकिन मासूम बच्चे—वही बच्चे जिनके लिए सब फैसले होते हैं—ठिठुरते हुए स्कूल जाते दिख रहे हैं। वजह? बीकानेर में अब तक अवकाश का ऐलान नहीं। नतीजा यह कि अभिभावक खुद ही छुट्टी कर रहे हैं और जिला प्रशासन के आदेश का इंतजार दो दिन से जारी है—शायद फाइल भी सर्दी में कांप रही हो।
कड़ाके की ठंड को देखते हुए प्रदेश के 25 जिलों में कक्षा 8 तक के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। जोधपुर ने तो समय बदलकर सुबह 10 बजे से स्कूल कर दिए, लेकिन बीकानेर में राहत फिलहाल “विचाराधीन” ही नजर आ रही है। उधर, शहर से लेकर गांवों तक घना कोहरा पसरा है। सुबह विजिबिलिटी इतनी कम कि सड़क पर चलना अंदाजे से होता है। गर्म कपड़ों में लिपटे बच्चों के हाथ-पैर जम रहे हैं और आंखों से पानी बह रहा है—ठंड पूरी तैयारी में है। जयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, दौसा सहित कई जिलों में बुधवार को भी घना कोहरा छाया रहा। जयपुर में तो विजिबिलिटी शून्य तक पहुंच गई। असर ट्रेनों और फ्लाइट्स पर भी पड़ा—जयपुर एयरपोर्ट से जाने वाली 8 फ्लाइट प्रभावित रहीं। मौसम विभाग ने तीन जिलों में घने कोहरे और शीतलहर का ऑरेंज अलर्ट, जबकि 18 जिलों में कोहरे और तीन में शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग का साफ कहना है—10 जनवरी तक ठंड से राहत की उम्मीद कम है।
अब सवाल बस इतना है—जब कोहरा और ठंड दोनों पूरे फॉर्म में हैं, तो बीकानेर में छुट्टी का फैसला कब तक गरम होगा?

