देवी सिंह भाटी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीकानेर की हालत देखकर ऐसा लगता है मानो ज़िले की देखभाल कहीं और की जा रही हो। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीकानेर दौरे के दौरान खुद उन्होंने भी सवाल किया था—“बीकानेर को आखिर हुआ क्या है?” सड़कों पर धूल, जगह-जगह गड्ढे और ऐसी स्थिति कि चलना भी चुनौती बन जाए—ये सब देखकर किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को चिंता होनी चाहिए। भाटी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ज़िले की व्यवस्था और देखरेख कलेक्टर के अधीन होती है, लेकिन बीकानेर में यह जिम्मेदारी शायद फ़ाइलों तक ही सीमित रह गई है।
उनका कहना था कि सरकार की ओर से बजट तो दिया जा रहा है, मगर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। जब ज़िम्मेदारी के साथ समय और संवेदनशीलता न जुड़ी हो, तो नतीजा सड़कों पर साफ दिखने लगता है। देवी सिंह भाटी ने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जाए, ज़िम्मेदारों से स्पष्टीकरण लिया जाए और बीकानेर की बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ—ताकि शहर सिर्फ नक्शे में नहीं, ज़मीन पर भी संभला हुआ दिखे।
भाटी ने कहा कलेक्टर की जिम्मेदारी है लेकिन बीकानेर की सड़कों पर धूल, गड्ढे और बेपरवाही—ज़िम्मेदारी किसकी?”

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