भीनासर की गोचर भूमि पर लंबे समय से चल रही अवैध कब्जों की कहानी आखिरकार रविवार, अमावस्या के दिन अपने अंजाम तक पहुंची—और वह भी बिना सरकारी मुहर के। जहां प्रशासन की फाइलें शायद अभी “विचाराधीन” ही थीं, वहीं गांव ने खुद फैसला सुना दिया।काफी बड़े क्षेत्र में पट्टी-टुकड़ा रोपकर “गौशाला” के नाम पर जमीन हड़प ली गई थी। सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट और डिजिटल मीडिया तक खबरें छपीं, चर्चाएं हुईं, पत्र लिखे गए—अधिवक्ता कैलाश सियाग ने जिला कलेक्टर और गंगाशहर थानाधिकारी तक को पत्र भेजा—लेकिन कार्रवाई? वह कहीं नजर नहीं आई। शायद सिस्टम अमावस्या का इंतजार कर रहा था।
आखिरकार आज सैकड़ों ग्रामीण एकजुट हुए और गोचर भूमि पर किए गए सभी अवैध कब्जों को अपने हाथों से उखाड़ फेंका। पट्टी-टुकड़ा हटे, कब्जे ढहे और संदेश साफ हो गया—जहां प्रशासन चुप हो, वहां गांव बोलेगा।ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी भी दी कि गौमाता की भूमि का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए और भविष्य में किसी भी तरह के कब्जों को पनपने न दिया जाए। वरना अगली बार फिर अमावस्या नहीं, जनता की एकजुटता तारीख तय करेगी

