बीकानेर में आयोजित खेजड़ी महापड़ाव अब केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि जनभावनाओं और जनसंकल्प का प्रतीक बन चुका है। इस ऐतिहासिक महापड़ाव में देशभर से बीकानेर पहुँचने वाले हजारों लोगों के लिए रहने और खाने-पीने की संपूर्ण एवं व्यवस्थित व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी सहभागी को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जाट धर्मशाला (पूर्व आरक्षित), बिश्नोई धर्मशाला सहित अन्य धर्मशालाओं में ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, वहीं मुकाम से भंडारा सहयोग दल बीकानेर पहुँच चुका है, जिससे भोजन और जल व्यवस्था लगातार सुचारु रूप से संचालित की जा रही है। 1 फरवरी से ही हजारों लोग गाँवों और ढाणियों से निकलकर बीकानेर पहुँचना शुरू हो चुके हैं, क्योंकि यह आंदोलन केवल खेजड़ी की रक्षा का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई है। महापड़ाव शांतिपूर्ण, संगठित और जनसमर्थन आधारित है, जहाँ हर व्यक्ति का स्वागत और सम्मान सुनिश्चित किया गया है। संदेश स्पष्ट है—अब लोग चुप नहीं बैठेंगे, घरों से निकलकर एकजुट होंगे और सरकार तक अपनी आवाज़ मजबूती से पहुँचाएँगे।
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