बीकानेर के खेजड़ी बचाओ महापड़ाव में आज मातृशक्ति की ऐतिहासिक मौजूदगी देखने को मिली। भारी संख्या में पहुंची माताओं और बहनों ने न सिर्फ महापड़ाव को मजबूती दी, बल्कि भव्य कलश यात्रा निकालकर साफ संदेश दे दिया कि अब आंदोलन केवल मंचों तक सीमित नहीं रहेगा। हजारों की संख्या में शामिल महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार अब तक सिर्फ आश्वासन देने की राजनीति कर रही है, लेकिन कानून बनाने की दिशा में कोई ठोस प्रावधान सामने नहीं आया। जनता का कहना है कि इस बार “देख लेंगे” और “कर देंगे” जैसे वाक्यों से काम नहीं चलेगा।
धरना स्थल पर रोज़ाना हजारों लोग मौजूद हैं और बिश्नोई धर्मशाला, बीकानेर स्थित महापड़ाव में प्रतिदिन 10 हजार से अधिक लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। यह केवल धरना नहीं, बल्कि जनसंकल्प बन चुका है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक खेजड़ी संरक्षण को लेकर स्पष्ट कानून नहीं बनता, तब तक यह महापड़ाव जारी रहेगा। अब सवाल यही है — सरकार कब समझेगी कि आश्वासन की नहीं, निर्णय की ज़रूरत है?
आश्वासन नहीं, अब कानून चाहिए — मातृशक्ति ने संभाली महापड़ाव की कमान, देखे पूरी खबर
Puchta Hai Bikaner की शुरुआत बीकानेर की असली समस्याओं को लोगों तक पहुँचाने की पहल के रूप में हुई थी। हमारी टीम बिना किसी लाग-लपेट के शहर और प्रदेश की आवाज़ आप तक पहुँचाने का काम कर रही है।"
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