बीकानेर में 1 किमी की दूरी, 4 किमी की सज़ा! रोज़ 1 लाख वाहन ‘सरकारी चक्कर’ काटने को मजबूर

puchta hai bikaner team
Puchta Hai Bikaner की शुरुआत बीकानेर की असली समस्याओं को लोगों तक पहुँचाने की पहल के रूप में हुई थी। हमारी टीम बिना किसी लाग-लपेट के...
2 Min Read

यह कोई आम शहर नहीं, संभाग मुख्यालय है। केंद्र में कानून मंत्री, प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री, पांच-छह आईएएस अफसर, सत्ता पक्ष के छह विधायक—यानी वीआईपी की भरमार। फिर भी शहर की हालत ऐसी, मानो कोई अनाथ छोड़ गया हो। सिस्टम कागज़ों में है, सड़कों पर नहीं। अगर आप पुलिस लाइन से जूनागढ़ जाना चाहते हैं, तो सीधा रास्ता भूल जाइए। भुट्टों के चौराहे पर दाहिने मुड़ने की आज़ादी पुलिस पहले ही “जब्त” कर चुकी है—बैरिकेड लगाकर। सोचा कि श्रीगंगानगर चौराहे से टर्न ले लेंगे? माफ़ कीजिए, वहां भी कीर्ति स्तंभ की तरफ पुलिस की कृपा से बैरिकेडिंग तैयार है। और अगर दीनदयाल सर्किल से कीर्ति स्तंभ जाने की कोशिश करेंगे, तो नगर निगम पिछले दो महीने से सड़क बंद कर “धैर्य परीक्षा” ले रहा है। नतीजा—तीन से चार किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर, वो भी रोज़। सवाल सीधा है—क्या ये परेशानी किसी को दिखती नहीं? या फिर जनता का समय और ईंधन मुफ्त समझ लिया गया है? यही कहानी जूनागढ़ के तीन फाटकों के पास भी दोहराई जा रही है। पब्लिक पार्क से आने वाला व्यक्ति शार्दूल सिंह सर्किल से घूमने को मजबूर है। जिस जगह टर्न लिया जाता है, वहां ठेले और टैक्सी वालों का स्थायी कब्ज़ा है—जगह इतनी कि गाड़ी नहीं, सिर्फ़ शिकायत निकल सके।

भुट्टों के चौराहे से कीर्ति स्तंभ जाने वाली सड़क पहले टूटी थी, अब सीसी बन गई। सड़क बनी तो लगा राहत मिलेगी, लेकिन पुलिस ने तुरंत वहां बैरिकेडिंग लगा दी। तर्क दिया गया—“यहां मुड़ने से जाम लगता है।” मज़े की बात ये कि उसी चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस तैनात रहती है, मगर उनका फोकस ट्रैफिक संभालने पर नहीं, चालान बनाने पर रहता है। मेहनत से बचने का सबसे आसान तरीका—बैरिकेड लगा दो और चालान काटो। नतीजा साफ़ है—बीकानेर में 1 किमी का सफर अब 4 किमी का सरकारी टूर बन चुका है, और जनता रोज़ यही पूछ रही है: शहर चल कौन रहा है—सिस्टम या बैरिकेड?

Share This Article
Puchta Hai Bikaner की शुरुआत बीकानेर की असली समस्याओं को लोगों तक पहुँचाने की पहल के रूप में हुई थी। हमारी टीम बिना किसी लाग-लपेट के शहर और प्रदेश की आवाज़ आप तक पहुँचाने का काम कर रही है।"
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version