पश्चिमी राजस्थान में ‘खेजड़ी बचाओ–प्रकृति बचाओ’ आंदोलन अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि जन आंदोलन का रूप ले चुका है। सोलर परियोजनाओं के नाम पर हरे वृक्षों की कटाई और पर्यावरण के साथ हो रहे समझौते के खिलाफ 2 फरवरी को बीकानेर बंद और ऐतिहासिक महापड़ाव का ऐलान कर दिया गया है। इस आंदोलन को नई धार तब मिली जब शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने विधानसभा में खेजड़ी और हरे वृक्षों की सुरक्षा के लिए सख़्त कानून की मांग उठाई। उनका बयान पूरे प्रदेश में गूंजा और आमजन के भीतर दबा आक्रोश खुलकर सामने आने लगा। पर्यावरण से जुड़े संगठनों का आरोप है कि जिला प्रशासन कॉरपोरेट दबाव में काम कर रहा है, और सोलर कंपनियों को खुली छूट दी जा रही है। जीव रक्षा सभा का कहना है कि जिन खेजड़ियों को राजस्थान की पहचान कहा जाता है, वही आज सबसे असुरक्षित हैं। पर्यावरण संघर्ष समिति ने साफ किया है कि इस आंदोलन का शंखनाद मुकाम पीठाधीश्वर रामानंद महाराज के सानिध्य में होगा। महापड़ाव में साधु-संत समाज, 36 कौम, जनप्रतिनिधि, पूर्व मंत्री-विधायक और पर्यावरण प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। 2 फरवरी को पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में विशाल जनसभा होगी, जिसके बाद विश्नोई धर्मशाला के सामने अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू किया जाएगा। वकील समाज और विभिन्न संगठनों के समर्थन से पूरा बीकानेर बंद रहेगा।
आंदोलन को जन-जन से जोड़ने के लिए ‘खेजड़ी की बेटी’ विषय पर नाटक, भजन संध्या और रात्रि जागरण जैसे कार्यक्रम भी होंगे। संदेश साफ है—पेड़ बचेगा तो प्रदेश बचेगा, और अगर अब भी नहीं सुना गया तो आंदोलन और तेज़ होगा।
2 फरवरी को बीकानेर बंद, महापड़ाव से सरकार को चेतावनी,खेजड़ी पर संकट, जनता सड़कों पर
Puchta Hai Bikaner की शुरुआत बीकानेर की असली समस्याओं को लोगों तक पहुँचाने की पहल के रूप में हुई थी। हमारी टीम बिना किसी लाग-लपेट के शहर और प्रदेश की आवाज़ आप तक पहुँचाने का काम कर रही है।"
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