बीकानेर पूर्व की ज़मीनी हकीकत-बीकानेर पूर्व क्षेत्र में ट्रैफिक और सड़क व्यवस्था अब सुविधा नहीं, रोज़ की परीक्षा बन चुकी है।
कभी जाम, कभी गड्ढे, तो कभी बंद पड़ी ट्रैफिक लाइट्स—ऐसा लगता है जैसे शहर नहीं, धैर्य की प्रयोगशाला चलाई जा रही हो।
कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक लाइट्स सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं। लाइट्स हैं, लेकिन चालू नहीं। सिग्नल हैं, पर सिस्टम नहीं। नतीजा—हर चौराहा पर लोग अपनी मर्जी चलाते है।सड़कें इतनी उबड़-खाबड़ हैं कि वाहन कम और झटके ज़्यादा चलते हैं।बरसात आए तो गड्ढे दिखते नहीं, और सूखा पड़े तो धूल से नज़र नहीं आती।
हर दिन लगने वाला जाम बता देता है कि प्लानिंग कागज़ों में जरूर है, ज़मीन पर नहीं।
जनता का सवाल सीधा है—जब बीकानेर पूर्व की यही हालत सालों से है, तो जनप्रतिनिधि आखिर कहां हैं?विधायक जी सिर्फ चुनाव के समय नज़र आते हैं, वादों की लिस्ट लेकर आते हैं और फिर पाँच साल का ब्रेक ले लेते हैं।
बाक़ी समय जनता सड़क पर, जाम में और धूल में दिखाई देती है। यह कोई राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि हर रोज़ की हकीकत है।लोग कहते हैं—“हमें बड़े भाषण नहीं चाहिए, बस चलने लायक सड़क और काम करती ट्रैफिक लाइट चाहिए।”बीकानेर पूर्व की जनता आज भी इंतज़ार में है—कि कब ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी,कब सड़कें सुरक्षित होंगी,और कब विकास पोस्टर से उतरकर सड़क पर उतरेगा
बीकानेर पूर्व में सड़कें सवाल पूछ रही हैं, ट्रैफिक लाइट्स मज़ाक बन चुकी हैं और विधायक जी सिर्फ चुनावी पोस्टर में दिखाई देते हैं — ये विकास है या इंतज़ार की सज़ा?

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Puchta Hai Bikaner की शुरुआत बीकानेर की असली समस्याओं को लोगों तक पहुँचाने की पहल के रूप में हुई थी। हमारी टीम बिना किसी लाग-लपेट के शहर और प्रदेश की आवाज़ आप तक पहुँचाने का काम कर रही है।"
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