खेजड़ी बचाओ महापड़ाव के दौरान एक अलग ही तस्वीर सामने आई। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि जो भी इस पड़ाव में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाइयों की रफ्तार अचानक तेज हो गई। भगीरथ जी, जो बज्जू से प्रधान प्रतिनिधि बताए जाते हैं, ने आरोप लगाया कि उनके पीछे कई प्रशासनिक गाड़ियां लगाई जाती हैं और उनसे लगातार सवाल-जवाब किए जाते हैं। उनका कहना है कि यह दबाव बनाने की कोशिश है। पूर्व पार्षद मनोज जी बिश्नोई ने भी दावा किया कि जब वे बीकानेर बंद का आह्वान करते हैं, तो उसी दिन शाम को उनके होटल “शौर्य 3.0” का निरीक्षण शुरू हो जाता है। वहीं, जयपुर बंद को लेकर बातचीत के बीच BDA की ओर से एक दिन में दस्तावेज़ पेश करने का नोटिस जारी होने की बात भी सामने आई। नोटिस में कथित रूप से लिखा था कि दस्तावेज़ प्रस्तुत न करने की स्थिति में होटल सील किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार 45 से 100 सरपंचों के भुगतान पर रोक लगाए जाने और कुछ संतों पर भी दबाव बनाए जाने की चर्चा रही। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि सीमित रही। आंदोलन स्थगित होने के बाद कुछ संतों और परसा राम जी ने जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
ये सभी आरोप जनता और पर्यावरण प्रेमियों की ओर से लगाए गए हैं। प्रशासन की ओर से इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया आना बाकी है।
खेजड़ी बचाओ महापड़ाव की अनदेखी कहानी — आंदोलन या ‘निरीक्षण अभियान’?

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