बीकानेर। 2 फरवरी 2026 को बीकानेर की धरती पर एक बड़ा महापड़ाव होने जा रहा है, जिसमें देशभर से खेजड़ी प्रेमी जुटेंगे। मुद्दा साफ है — खेजड़ी की कटाई पर आखिर कब लगेगी असली रोक? आरोप है कि सरकार संरक्षण के नारे तो खूब लगाती है, लेकिन ज़मीन पर हालात कुछ और ही कहानी कहते हैं। खेजड़ी की कटाई जारी है और प्राइवेट कंपनियों से सांठगांठ के आरोपों ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेजड़ी प्रेमियों का कहना है कि जब पेड़ बचाने की बात आती है, तो नियम अचानक “लचीले” हो जाते हैं — शायद इसलिए क्योंकि जेबें सख्त हो चुकी हैं। महापड़ाव में साफ संदेश देने की तैयारी है कि खेजड़ी कोई सौदे की चीज़ नहीं, बल्कि राजस्थान की पहचान और जीवनरेखा है। आयोजकों का दावा है कि इस बार सिर्फ नारे नहीं, बल्कि सरकार से सीधे जवाब मांगे जाएंगे।
इस आंदोलन को लेकर विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने भी समर्थन जता दिया है, जिससे महापड़ाव का राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। सवाल यही है कि क्या सरकार इस बार सुनेगी, या फिर हमेशा की तरह पर्यावरण “फाइलों में सुरक्षित” रहेगा?
2 फरवरी को बीकानेर बताएगा —खेजड़ी कटेगी या कटौती सिर्फ जनता की उम्मीदों में होगी?
खेजड़ी कटेगी तो कुर्सी हिलेगी!”2 फरवरी को बीकानेर में महापड़ाव, सरकार को आईना दिखाने जुटेंगे खेजड़ी प्रेमी

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