मथुरा के यमुना एक्सप्रेस-वे पर घने कोहरे ने ऐसा सीन रचा कि हाईवे कुछ देर के लिए रेस ट्रैक नहीं, हादसों की कतार बन गया। अचानक धीमी हुई एक बस के पीछे रफ्तार में दौड़ते वाहन टकराते चले गए—नतीजा, 7 बसें और 3 कारें एक-दूसरे में समा गईं। टक्कर के साथ ही आग भड़क उठी और चार लोग ज़िंदा जल गए, जबकि दर्जनों यात्री चीख-पुकार के बीच फंसे रह गए। हादसे की भयावहता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ लोग बसों के शीशे तोड़कर जान बचाते दिखे, तो कुछ अंदर ही रह गए। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक टक्कर के बाद ऐसा लगा मानो कोई विस्फोट हो गया हो। शुरुआती जानकारी में 66 घायलों को अस्पताल पहुंचाने की बात सामने आई, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि 20 से ज्यादा एम्बुलेंस लगातार घायलों को ले जाती रहीं और संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
यह हादसा थाना बलदेव क्षेत्र में माइलस्टोन 127 के पास हुआ, जहां पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ ने करीब छह घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। आग बुझाने और फंसे लोगों को निकालने के बाद ही हालात काबू में आ सके, तब तक एक्सप्रेस-वे पर लंबा जाम लग चुका था।घटना के बाद राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है, लेकिन सवाल वही है—जब कोहरा चेतावनी देता है, तब रफ्तार क्यों नहीं मानती?



