बीकानेर | हकीकत यह है कि पिछले साल भी पंजाब ने नहरबंदी तो ली, लेकिन राजस्थान फीडर की मरम्मत शुरू नहीं की। तब भी सवाल उठा था कि जब मरम्मत करनी ही नहीं थी, तो नहरबंदी क्यों? इस साल भी हालात कुछ अलग नहीं थे। पंजाब इस बार भी पहले नहरबंदी लेना चाहता था, मरम्मत बाद में।असल वजह साफ है। पंजाब की प्राथमिकता राजस्थान फीडर नहीं, बल्कि उसकी खुद की नहरें हैं—सरहिंद फीडर और फिरोजपुर फीडर। पहले वहां काम होगा, राजस्थान की बारी बाद में आएगी। तर्क यह दिया जा रहा है कि इन नहरों की मरम्मत से राजस्थान को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिलेगा, क्योंकि समानांतर चल रही दरकी हुई नहरें बाढ़ का खतरा पैदा कर सकती हैं।लेकिन सवाल अब भी जस का तस है—राजस्थान फीडर की मरम्मत 2020 में शुरू हुई थी और इसे तीन साल में पूरा होना था। अब छह साल होने जा रहे हैं, फिर भी काम अधूरा है। इसी वजह से हर साल आईजीएनपी में करीब 60 दिन की नहरबंदी ली जाती है, वह भी मई जैसे महीने में, जब पानी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है।नतीजा वही पुराना—खेती प्रभावित, पेयजल संकट गहराता हुआ और हर साल वही वादा कि “अगले साल हालात सुधरेंगे।”राजस्थान इंतज़ार में है, पानी इंतज़ार में है… और मरम्मत अब भी फाइलों में बह रही है।



