बीकानेर में पानी की किल्लत नई बात नहीं, लेकिन पुरानी गिन्नाणी–सांखू डेरा की कहानी कुछ और ही है।
यहां पानी नहीं… सीवर मिक्स “स्पेशल पैकेज” आता है!
वो भी पिछले कई-कई सालों से।
मोहल्ले वालों ने बताया कि जब भी लोग आवाज उठाते हैं, उन्हें “सब ठीक कर देंगे” वाला झूठा दिलासा देकर चुप करा दिया जाता है।
लेकिन असली ड्रामा शुरू होता है तब—जब बात मीडिया तक पहुंचती है।
JEN साहब को जैसे ही कैमरा दिखा, वो खुद हक्का-बक्का मोड में चले गए! कहने लगे —“शिकायत मत करो, हम जल्द समस्या सुलझा देंगे।”
लेकिन जनता का कहना है कि साहब की वो ‘जल्द’ वाली बात अब एक साल पार कर चुकी है… और साहब खुद इस इलाके में दोबारा आए तक नहीं! फोन? अरे वो तो महीनों से Silent + Not Reachable तीनों एक साथ चल रहा है।JEN (दिनेश कुमार प्रजापत) साहब कोलायत में पोस्टेड हैं, लेकिन गिन्नाणी का चार्ज भी दे रखा है।मोहल्ले वाले कहते हैं—“दो जगह की कुर्सी… लेकिन एक भी जगह का काम नहीं।”
10/12/2025 को जब लोग AEN सर तक पहुंचे तो वहाँ से नया खेल शुरू हो गया—“आप पार्षद के पास जाएं, वो सीवरेज लाइन सफ़ाई करवाएंगे।”मतलब जनता को सीधा ऑफिस-से-ऑफिस चक्कर कटवाओ।
लेकिन असल में समस्या वही की वही—सीवरेज भरा मिक्स पानी रोज़ नलों से बह रहा है। जब मोहल्ले वाले पार्षद के पास गए तो उनका जवाब और भी शानदार—“हमने लिखित दे दिया है… ऊपर वाले नहीं सुनते।”ऊपर वाले कौन हैं? ये आज तक किसी को नहीं पता। और नीचे वाले सिर्फ पल्ला झाड़ने में एक्सपर्ट।मोहल्ले वालों ने रिपोर्ट देते हुए बताया—“हम इतने सालों से झेल रहे हैं, अब हालात ऐसे हैं कि पानी से बीमारी ज्यादा डरावनी नहीं… सिस्टम की चुप्पी ज्यादा डरावनी है।”
सबसे ज्यादा गंदा पानी आता है —गिन्नाणी के बागवानों का मोहल्ला: टोकला हाउस से घाटवा हाउस वाली पूरी लाइन।
यहां के लोग कह रहे हैं—“हमें साफ पानी चाहिए साहब, भाषण नहीं। काम चाहिए, कमेटी मीटिंग नहीं।”

