बसें आ रही हैं, लेकिन सड़कों की हकीकत क्या है? शहर में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए नई बस सेवाओं की घोषणाएं हो रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत अब भी सवाल खड़े कर रही है। जिन सड़कों से इन बसों को गुजरना है, उनकी हालत कई इलाकों में बेहद खराब है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी सतह, अधूरी मरम्मत और बरसात के बाद पानी भराव आम समस्या बन चुका है।
शहर के प्रमुख मार्गों पर आवागमन पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। कई इलाकों में सड़कें संकरी हैं, कहीं अतिक्रमण है तो कहीं खुदाई के बाद महीनों से मरम्मत नहीं हुई। ऐसे में भारी और नियमित बस संचालन के लिए इन मार्गों को सुरक्षित और सुचारु बनाना बेहद जरूरी है।
विकास योजनाओं की घोषणाएं स्वागत योग्य हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की अनदेखी से उनका उद्देश्य अधूरा रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बस सेवा शुरू करने से पहले सड़कों की स्थिति का व्यापक सर्वे और मरम्मत कार्य प्राथमिकता पर होना चाहिए।
आमजन की अपेक्षा है कि योजनाएं सिर्फ कागज़ों और मंचों तक सीमित न रहें, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी दिखाई दें। शहर को बेहतर परिवहन सुविधा तभी मिल सकेगी, जब सड़कें वास्तव में चलने लायक हों और यातायात सुरक्षित व सुगम बनाया जाए।



