खेजड़ी बचाओ महापड़ाव को आज तीसरा दिन हो चुका है, लेकिन अब तक न तो सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने आया है और न ही किसी ठोस कार्रवाई की घोषणा की गई है। आंदोलन स्थल पर सैकड़ों लोग पिछले 48 घंटे से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं, कई लोग सीमित भोजन और पानी में संघर्ष कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि बड़े कॉरपोरेट समूहों की आवाज़ तुरंत सुनी जाती है, लेकिन जब आम जनता पर्यावरण और जीवन से जुड़े मुद्दों को उठाती है, तो प्रशासनिक सिस्टम अचानक शांत हो जाता है। लगातार समर्थन बढ़ने के बावजूद सरकार की चुप्पी यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या फैसले केवल फाइलों तक ही सीमित रह गए हैं?
बीकानेर और राजस्थान के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी चर्चा तेज़ हो गई है। जनता पूछ रही है—जब हालात गंभीर हों, तब प्रतिनिधि कहाँ हैं? यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए खेजड़ी और प्रकृति को बचाने की आवाज़ है।
तीन दिन बीत गए… जवाब अब भी मौन में है” — खेजड़ी महापड़ाव पर सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में
Puchta Hai Bikaner की शुरुआत बीकानेर की असली समस्याओं को लोगों तक पहुँचाने की पहल के रूप में हुई थी। हमारी टीम बिना किसी लाग-लपेट के शहर और प्रदेश की आवाज़ आप तक पहुँचाने का काम कर रही है।"
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