अस्पताल आने वाले लोग मुख्य सड़क पर गाड़ियाँ लगा देते हैं। नतीजा—जाम और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बीकानेर की सड़कें इन दिनों जाम के बोझ से कराह रही हैं। सुबह से लेकर देर रात तक शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम आम बात हो गई है, लेकिन यातायात विभाग अभी भी प्रभावी कदम उठाने में नाकाम नजर आ रहा है। टारगेट पूरे, लेकिन ट्रैफिक ठप! विभाग हेलमेट व चालान के लक्ष्य पूरा करने में जुटा है, पर शहर की जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है। मुख्य सड़क के दोनों ओर फल-सब्जी के गाड़े जमाए बैठे हैं, जिन्हें हटाने की कोई गंभीर कार्रवाई नहीं दिखती। तिपहिया वाहनों को जहां-तहां खड़ा कर दिया जाता है, जिससे दोनों तरफ लंबी कतारें लग जाती हैं।
वन-वे भी फेल—सांखला फाटक व कोटगेट पर दिनभर जाम वन-वे व्यवस्था के बावजूद दोनों ओर से वाहन आने से लंबे जाम की स्थिति बन जाती है। बड़ा बाजार: ट्रैफिक का सबसे बड़ा दर्द:-न तो ट्रैफिक कर्मी मौजूद, न ही कोई नियंत्रण। दुकानदारों ने फुटपाथ तक कब्जा कर रखा है, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।
मोहता चौक: शाम होते ही ‘नो एंट्री ज़ोन‘ जैसा हालभीड़, जाम और अफरातफरी—शाम को यहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं।




