बीकानेर में पास हुआ बजट – गया कहां?
अकेले नेता नहीं खा सकता, कहीं न कहीं प्रशासन की मिलीभगत ज़रूर है!
हर साल बीकानेर के विकास के नाम पर करोड़ों का बजट पास होता है। घोषणाएँ होती हैं, योजनाएँ बनती हैं, मीडिया में बड़े-बड़े विज्ञापन छपते हैं। लेकिन जब जनता सड़कों पर निकलती है तो हकीकत सामने आती है – न सड़क सुधरी, न नालियाँ बनीं, न शहर साफ़ हुआ।
बजट का रहस्य
शिक्षा के लिए पैसा आया – स्कूल वही जर्जर।
स्वास्थ्य के लिए पैसा आया – अस्पतालों में दवाई तक नहीं।
सड़कों के लिए पैसा आया – गड्ढे पहले से गहरे।
पर्यटन के लिए पैसा आया – धरोहरें अब भी खंडहर।
तो आखिर यह बजट गया कहां?
नेता और प्रशासन की जुगलबंदी
सच्चाई यह है कि बजट की गड़बड़ी में नेता अकेला नहीं हो सकता। कहीं न कहीं प्रशासन की मिलीभगत भी है।
टेंडर पास होता है, काम अधूरा छोड़ दिया जाता है।
फाइलों में पूरा काम दिखाया जाता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत जीरो।
बीकानेर में पास हुआ बजट – गया कहां?

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