बीकानेर में चल रहे आमरण अनशन के दौरान हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अब तक 18 आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिनमें एक संत की हालत अत्यंत नाज़ुक होने पर उन्हें पीबीएम अस्पताल के ICU में रेफर करना पड़ा। धर्मशाला के पास बनाए गए अस्थायी वार्ड में जब डॉक्टरों ने आंदोलनकारियों को ग्लूकोज चढ़ाने की सलाह दी, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। अनशनकारियों का कहना था— “मर जाएंगे, लेकिन शरीर में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे।” दवाइयाँ भी बिना पानी के ही निगल ली गईं। स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब एक संत की हालत अचानक ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत पीबीएम भेजा गया और ICU में भर्ती करना पड़ा। इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया या आश्वासन सामने नहीं आया है, जिससे आक्रोश और गहराता जा रहा है। इस बीच आंदोलन को समर्थन देने थान सिंह डोली करीब 100 गाड़ियों के काफिले के साथ बीकानेर पहुंचे, जिससे महापड़ाव में भीड़ और उत्साह दोनों बढ़ गए। युवाओं के बढ़ते जोश और हालात को देखते हुए कैंडल मार्च को रद्द कर दिया गया। वहीं, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला कलेक्टर ने भारी पुलिस बल तैनात कर रखा है।
अब सवाल सिर्फ सेहत का नहीं, सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही का भी है—
कितनी तबीयतें और बिगड़ेंगी, तब जाकर आवाज़ सुनी जाएगी?
आमरण अनशन का असर तेज़—18 की तबीयत बिगड़ी, एक संत ICU में भर्ती, सरकार अब भी मौन

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